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मनस सरोवर

                
                                                         
                            मनस सरोवर
                                                                 
                            

मनस सरोवर की हंसा
कोयल सी हूक रही l
सुर बेसुर अधम कीच में
सत मोती ढूँढ रही l

दस ताले खोल किवाड़ी
कितने पिंजरे छूटे l
छ्द्म भंवर में डूब डूब
सपने अनगिन टूटे l
भाव कुभाव हिंडोले में
रस गणिका झूल रही l

आँख बंद ले हाथ छड़ी
सिर थानेदार खड़ा है l
मैं पन का बकरा मूरख
खुद बलि के लिए अड़ा है l
भर भर हाथ उलीचा जल
अब नैया डूब रही l

मधुश्री के.
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3 महीने पहले

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