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ग़ज़ल -"आजाद हो गए"

                
                                                         
                            तुम मुहब्बत में हमसे आजाद हो गए।
                                                                 
                            
खुश होगे बहुत, हम बरबाद हो गए।।

मयखाने में जैसे हुआ जिक्र तेरा,,,,
हजारों रुपये यूँ खराब हो गये।

जिंदगी ने सिखाया, हरेक मोड़ पे जो,,,,
वो सारे सबक हमको याद हो गए।

गुलदस्ता दिया था जो पहली दफा तू,,,
वो सूखे सड़े से गुलाब हो गए।

मिले क्या थे "जय" से, तुम संगम किनारे,,,
भाव खाते हो जैसे, इलाहाबाद हो गए।



 
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2 महीने पहले

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