शक है एक जहरीला बीज,
जहाँ जमे वहाँ भरते खीज ।
सदा सत्य से रखता दूर,
असत्य का फैलाए भ्रम भरपूर ।
भरोसा हर मन की है नीव,
भरोसे बिन तड़पे जीव ।
शक को कभी तुम जगह न देना,
सीखे यकीन की राह पर चलना ।
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