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अभी तुम्हारी कहानी बाकी है

                
                                                         
                            जो प्यासा भी चलता जाता है,
                                                                 
                            
वही सागर तक पहुँच पाता है।
राहें प्यास बढ़ाएँ तो क्या,
धूप तुम्हें सताए तो क्या
अभी साँसों में रवानी बाकी है,
अभी तुम्हारी कहानी बाकी है।

जो बीज अँधेरे में पलता है,
वही एक दिन वृक्ष बनता है।
मिट्टी उसे दबाए तो क्या,
मौसम उसे सताए तो क्या,
अभी जड़ों में ज़िंदगानी बाकी है,
अभी तुम्हारी कहानी बाकी है।

जो राख तले भी जलती है,
वही आग फिर निकलती है।
आँधी आग बुझाएँ तो क्या,
वक़्त तुम्हें मिटाए तो क्या।
अभी राख में चिंगारी बाकी है,
अभी तुम्हारी कहानी बाकी है।

जो नाव भँवर से लड़ती है,
वही किनारे पर पहुँचती है।
लहरें उसे डुबाएँ तो क्या,
तूफ़ान राह भटकाएँ तो क्या
अभी उम्मीद की निशानी बाकी है
अभी तुम्हारी कहानी बाकी है।

जो पत्थर-पत्थर चढ़ता है,
वही शिखर तक बढ़ता है।
पैरों में छाले आएँ तो क्या,
आँसू तुम्हें रुलाएँ तो क्या।
अभी जीत की तैयारी बाकी है
अभी तुम्हारी कहानी बाकी है।

जो अपने डर को जीतता है,
वह अपनी तक़दीर लिखता है।
किस्मत अगर रूठ जाए तो क्या,
ज़माना तुम्हें ठुकराए तो क्या,
अभी तुम्हारी बारी बाकी है,
अभी तुम्हारी कहानी बाकी है।
- जया जायसवाल
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10 घंटे पहले

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