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बेसब्रियां

                
                                                         
                            जिंदगी मे किसी के साथ दुश्मनी अच्छी नही
                                                                 
                            
और इन आसुओं के साथ दोस्ती अच्छी नही

जो खुद को कभी काबिल न बना पाए
वो न कहे ये जिंदगी अब अच्छी नही

कोई किसी का दिल दुखाकर सब पर हंसे
उसके चेहरे पर मुस्कुराहट हर वक़्त अच्छी नही

जो दूसरों का जीवन को अंधेरे मे रखे
उसके जीवन मे खुशियों कि रोशनी अब अच्छी नही

सब्र करने की कला दिल को सिखा दो
हर समय जेहन मे बेसब्रियां इतनी अच्छी नही
- जतिन कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

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