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जिंदगी बनके

                
                                                         
                            मै अंधेरों मे घिरा था...
                                                                 
                            
तुम आए जिंदगी मे रौशनी बनके...

मै गमों से भरा था...
तुम आए जिंदगी मे खुशी बनके...

मै जख्मो से घायल था..
तुम आए जिंदगी मे मरहम बनके..

मै तो एक आवारा-सा परिंदा था...
तुम आए जिंदगी मे आशियाना बनके...

मै तो मौत की तलाश मे भटकता था...
तुम आए खूबसूरत जिंदगी बनके...

मैं तो साँसें भी नही ले रहा था...
तुम आए हर साँस में जिंदगी बनके...

मैं तो टूटे ख़्वाबों का कारवाँ था...
तुम आए जिंदगी का फ़साना बनके...

मैं तो खुद से ही बेगाना था...
तुम आए जिंदगी का आईना बनके...

मैं तो एक साया था तन्हाई का...
तुम आए रंगीन जिंदगी का चिराग़ बनके...

अब जो भी हूँ, तुम्हारा असर है मुझपे...
तुम आए, और मैं,,, 'मैं' बन गया तुम्हारा बनके...

- जतिन कुमार
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एक वर्ष पहले

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