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ऐसे हालात में ईमान बचेगा कैसे

                
                                                         
                            ऐसे हालात में ईमान बचेगा कैसे
                                                                 
                            
सच अकेला है मगर फिर भी झुकेगा कैसे

अब तो सड़कों पे उतरना ही पड़ेगा यारो
ज़ुल्म जब हद से बढ़ेगा तो रुकेगा कैसे

जंग के शोर में मासूम दुआएँ दबतीं
राख के ढेर में फिर फूल खिलेगा कैसे

रोज़ अख़बार में लाशों की ख़बर आती है
अब परिंदों का यहाँ दिल भी लगेगा कैसे

नर्म मिट्टी थी मगर ख़ून से सख़्त हो बैठी
ऐसे मौसम में कोई बीज जमेगा कैसे

माँ ने बच्चों को खिलौनों की तसल्ली दी है
भूखे होंठों पे मगर फूल खिलेगा कैसे

तेरे जाने से मुझे फ़र्क नहीं था लेकिन
इस अँधेरे में कोई चाँद उगेगा कैसे
-एम मिश्र
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48 मिनट पहले

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