इन जुल्फों की बदलियों में मुझे सो जाने दो
आज सारे रंज ओ ग़म मुझे भूल जाने दो
अपने लबों को आज एक तकल्लुफ़ दो
जो भी सोचा है बस आज कह जाने दो
अपनी आँखों में रखो बस मुझे बसा कर
आने जाने वालों को बस आने जाने दो
अपने आँचल से रखो तुम मुझे बाँध कर
जाना चाहूँ मैं कहीं तुम ना जाने दो
मेरे दिल में तुम रहो तेरे दिल में रहूँ मैं
मकान नहीं है अगर तो घर बन जाने दो
आ मैं तुझे जावेदाँ प्यार करूँ
वक़्त गुज़रता है अगर तो गुज़र जाने दो
-नूर हसन
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