हिन्दुस्तान के थे पाकिस्तान चले गए हों
एक ही माँ के बेटे थे माँ भी बाँट गए हों
सरहद तो सिर्फ़ लकीर थी नफ़रत हमने पाली है
हमने अपने अपनों पे गोलियाँ तानी है
ये सियासत का खेल था तुम ख़ुद लड़ो मरो
ये हमारा हाल है हम खेल समझते नहीं हैं
ये ज़मीनी लड़ाई है ख़ुदा को क्या मुँह दिखाओगे
आपस में ही लड़ते रहोगे या अपनों को बचाओगे
ये हिन्दुस्तान पाकिस्तान फिर भी तो बाद का हाल है
हम तो अपने हिन्दुस्तान में ही बेहाल हैं
न जाने क्या मजबूरी होगी हमारे उस राजा की
प्रजा जिसकी है परेशान राजा जिसका अनजान है
-नूर हसन
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