रंग-बिरंगे सुमनों की कलियों में,
हमने भँवरों के गुञ्जर को देखा है।
कलियों का खिलना और खिलकर
कुम्हलाना भी हमने देखा है।।1।।
नवयौवन सुगन्ध थी जबतक आलि,
तब तक तुमने रस स्वाद लिया था।
पर कुम्हलाते ही तुमने उसको त्याग दिया था,
है समय अब यही समझ लो यारों।
'अंजुमन' में है नश्वर सब कुछ,'
'प्रकाश' में ही है सस्वर सब सुख।।2।।
-जय प्रकाश गुप्ता
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