"समय का विवेक"
जीवन सिखाता हर पल एक नई बात,
हर घड़ी का अपना अलग अंदाज और साथ।
जहाँ प्रेम की गंगा बहती हो निर्मल,
वहाँ बन जाओ सरल, विनम्र और कोमल।
धैर्य रखो, वाणी में मिठास घोलो,
शांति की चादर सबके मन पर डोलो।
पर जहाँ अन्याय का अंधकार घिर आए,
अधर्म सर उठाकर सत्य को मिटाए,
वहाँ साहस की ज्वाला को मत बुझने दो,
दृढ़ होकर आत्मबल से सीना तान लो।
हनुमान ने भी यही लीला दिखाई,
"सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा,
बिकट रूप धरि लंक जरावा।"
समय देखकर रूप बदला, कर्तव्य निभाया।
महानता ताकत के शोर में नहीं बसती,
विवेक की डोर थामे जो, वही सच्ची हस्ती।
जानो कब झुकना है, कब अडिग रहना है,
सत्य के पक्ष में हर बार खड़ा रहना है।
यही संतुलन जीवन की सबसे बड़ी पहचान,
यही है बुद्धिमानी, यही है असली ज्ञान।
— जगदीश प्रसाद शर्मा
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