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खालीपन में भी कुछ उगता है

                
                                                         
                            "खालीपन में भी कुछ उगता है"
                                                                 
                            

कुछ लोग, कुछ रिश्ते, कुछ सपने ऐसे,
खो जाएँ तो लगे, हम ही खो गए जैसे।
लगे जीवन का हिस्सा, कहीं छूट गया है,
कोई अपना पन्ना, किताब से टूट गया है।

दर्द गहरा हो, तो आँखें जी-भर रोती हैं,
खाली दीवारें भी, फिर कुछ टटोलती हैं।
पर समय धीरे से, कान में कहता है,
हर बिछड़ना सिर्फ, खालीपन नहीं रहता है।

जो पास नहीं रहा, वो रूप बदल कर आता है,
कहीं और, किसी और तरह, फिर से मुस्काता है।
कोई जाता है तो, यादें छोड़ जाता है,
वही यादें बन कर, जीवन भर साथ निभाता है।

कुछ सपने टूटे, तो आसमां नहीं टूटा,
उसी टूटन से ही, नया रस्ता फूटा।
जीवन की आदत है, कमाल कर देता है,
जहाँ खालीपन दिखे, वहीं फूल धर देता है।

इसलिए जो गया, उसे जाने ही दो,
जो बचा है दिल में, उसे ही बोने दो।
खोना भी तो इक, बोना ही तो है,
हर अंत में ही, नया होना ही तो है।
-- जगदीश प्रसाद शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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