"हमें अपने योग्य बना दो"
इतनी सुंदर सृष्टि रची, घर परिवार दिया,
प्रेम दिया, कर्तव्य दिया, मोह का संसार दिया॥
जीवन की उठल-पुथल में, कभी दूर हुए तुमसे,
कभी दर्द में तड़प कर, पास आए हम तुमसे॥
नेति-नेति कह कर वेद, तुम्हें ही गाते हैं,
तुम अनंत हो प्रभु, हम कहाँ समझ पाते हैं॥
हे प्रभु! मन चाहता है, झंझट से दूर हो जाऊँ,
तेरी दया का अनुग्रह, बस एक बार पा जाऊँ॥
तेरी मातृत्व भरी गोद, मुझे नसीब हो जाए,
वात्सल्य भरा हाथ, मेरे सिर पर आ जाए॥
पवित्र प्रेम से तेरा, आलिंगन मिल जाए,
शांति की मीठी लोरी, कानों में घुल जाए॥
परम संतोष मिले, परम आनंद मिल जाए,
तेरी गोद में प्रभु, चिर निद्रा मिल जाए॥
हे प्रभु! हमें अब, इस योग्य बना दो,
तप-तपाकर प्रभु, शुद्ध-पूर्ण बना दो॥
इतना शुद्ध करो कि, हम तुममें समा जाएँ,
बूँद सागर में जैसे, एक रूप हो जाए॥
- जगदीश प्रसाद शर्मा
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