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हे सखा! राह दिखा

                
                                                         
                            "हे सखा! राह दिखा"
                                                                 
                            

हे ईश्वर, ज्ञानिजन कहते हैं,
यह जीवन, सुख-दुख का लेखा,
सब प्रारब्ध और कर्मों का है,
तू न्यायी है, तू ही साक्षी एका।

कर्म करते समय हम सोचते नहीं,
फल में दुख आए तो तुझको पूछें।
"प्रभु! ऐसा मेरे साथ ही क्यों?"
अपनी भूलों को हम कभी न सूझें।

पिता! अज्ञान का अंधकार मिटा दे,
सद्बुद्धि, विवेक, प्रज्ञा से सजा दे।
तेरा दोष न दें, अपने कर्म सुधारें,
अंतर में सत्य का दीप जला दे।

परिश्रमी, उद्यमी, कर्मयोगी बनाएं,
तेरा हाथ सदा सिर पर थामे।
शुद्ध, पवित्र, कल्याणकारी बनकर,
परोपकार के पथ पर हम चलें।

राह दिखा, हे सखा, राह दिखा।
ऋत पर चलने की शक्ति दे।
बंधन मुक्त कर, मोह तोड़ दे,
चरणों में भक्ति की भेंट दे।
-जगदीश प्रसाद शर्मा
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2 महीने पहले

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