आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज ही जीवन है

                
                                                         
                            अतीत देता सीख हमें, अनुभवों की वो थाती है,
                                                                 
                            
भूलों में छिपा ज्ञान है, जो राह नई दिखलाती है।

भविष्य हमें सपने दे, आशाओं के दीप जलाए,
मेहनत से मंजिल मिले, ये विश्वास हमें भर जाए।

पर जीवन का सच तो बस, वर्तमान में ही बसता है,
कल की चिंता और पछतावा, आज की खुशी को हरता है।

बीता कल लौटे ना, और आने वाला है अनजाना,
इसलिए आज का हर पल, अपने हाथों से संवारना।

सीख ले अतीत से तू, और सपनों को साध ले,
पर कर्म कर अभी इसी पल, अपना सर्वोत्तम साध ले।

एक सही निर्णय आज का, कल को सुंदर बना देता,
अतीत की भूलें भी तभी, अर्थ नई ले लेता।

जो संवारे वर्तमान को, उसका हर कल निखर जाता,
याद रखो, जीवन की डोर, आज के हाथों में आता।
- जगदीश प्रसाद शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर