कद को छोटा करके, झूठ मत बोलो,
पेट मोटा करके, झूठ मत बोलो।
सात पीढ़ी - सात समंदर पार,
माल इकट्ठा करके, झूठ मत बोलो।
जो तुमसे आगे है, उसकी टांग मत खींचो,
इधर-उधर से सट्टा करके, झूठ मत बोलो।
अधिकार को सम्मान का हक रहने दो,
हक को हट्टा-कट्टा करके, झूठ मत बोलो।
गधे को ताज पहना के, घोड़ा मत बोलो,
यूँ समझौता करके, झूठ मत बोलो।
जो जैसा है, उसको वैसा रहने दो,
झूठ को सच्चा करके, झूठ मत बोलो।
-जगदीश चन्द्र कापड़ी
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