लेकर बहाना, मौत एक पल की होती है।
सकून-ए-जिंदगी, ज़िंदगी हर पल की होती है।
धूल चाट-चाट कर बड़ा हुआ जो,
जिंदगी उसकी प्रत्येक पल की होती है।
निमंत्रण सबको है, खोदो ज़मीं, निकालो सोना,
आमंत्रण वहीं है, जहाँ गरज नेक पल की होती है।
कलह, रोग, फूल, हँसी, आँसू सभी शामिल हैं,
हो ग़म या ख़ुशी, बस कुछ एक पल की होती है।
कुछ कमज़र्फ़ चूना लगा रहे पर्वतदिगार को,
वो मालिक हैं, उसे ख़बर हर एक पल की होती है।
जीत भी पल की, हार भी पल की होती है।
मौत से पहले जिंदगी हर पल की होती है।
...जगदीश चन्द्र कापड़ी
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