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दोस्ती ये दोस्ती

                
                                                         
                            दोस्ती,
                                                                 
                            
ये दोस्ती,
बड़ी अजीब है ये दोस्ती,
मगर खुशनसीब है ये दोस्ती।

दिल से वो अच्छा हो।
मन से सच्चा हो।
बताए बिना एहसान करें।
बार-बार मगर परेशान करें।
फिर कभी वो रूठा सा।
इंसान नहीं जैसे ठूॅठा सा।
और जब आ पड़ी मुसीबत।
चुकानी हो, भारी कीमत।
तो लेन-देन का हिसाब न रहा।
कोई डायरी या किताब न रहा।
दोस्ती लेने-देने का व्यापार नहीं,
दिल से निभाने का व्यवहार है।
दोस्ती,
ये दोस्ती,
बड़ी अजीब है ये दोस्ती,
मगर खुशनसीब है दोस्ती।

दोस्ती,
खूबसूरत है दोस्ती।
जरूरत है दोस्ती।
दोस्ती केवल शब्द नहीं।
एहसास है शर्त नहीं।
रिश्ता ऐसा
जो हम खुद चुनते हैं।
"खून के रिश्ते से बड़ी है दोस्ती"
कुछ लोग कहते हैं।
जैसे हो, रहो वैसे,
दोस्त से क्या दिखावा करना,
जी भर हँसते जब साथ में,
फिर क्यों परेशानी छुपाना।
दोस्त,
दोस्त आत्मा से जुड़ा परात्मा है।
इसका प्रमाण, कृष्ण का सुदामा है।
कहीं दुर्योधन का करण है।
तो कहीं श्रीराम का विभीषण है।
कहीं बाली का भाई सुग्रीव है।
जिसे बाली से बचाया, यही तो मीत है।
दोस्ती,
ये दोस्ती,
बड़ी अजीब है ये दोस्ती,
मगर खुशनसीब है ये दोस्ती।

दोस्ती,
दोस्ती के प्रकार बहुत हैं।
सच्ची दोस्ती
मतलब की दोस्ती
बचपन की दोस्ती
स्कूल की दोस्ती
धूल की दोस्ती
छाते वाली दोस्ती
सायें वाली दोस्ती
किताब वाली दोस्ती
सवाल-जवाब वाली दोस्ती
पतंग वाली दोस्ती
एक ही पलंग वाली दोस्ती
गुब्बारे वाली दोस्ती
सहारे वाली दोस्ती
चाय वाली दोस्ती
परछाई वाली दोस्ती
इलेक्शन तक दोस्ती
रेवले जंक्शन तक दोस्ती।
आदि-आदि
अनगिनत दोस्ती।
दोस्ती,
ये दोस्ती,
बड़ी अजीब है, ये दोस्ती,
मगर खुशनसीब है ये दोस्ती।

सच्ची दोस्ती
कभी खत्म नहीं होती।
देखकर तरक्की दोस्त की
कभी जलन नहीं होती।
दोस्ती जिंदगी को
आसान बनाती है।
रंगीन और
यादगार बनाती है।
दोस्ती का कोई मोल नहीं।
दिखावे से परे है, इसका कोई तौल नहीं।
दोस्ती पूजा है, विश्वास है।
साथ बिताए जो पल वही खास है।
यह दौलत, शोहरत मिट जाएंगे।
तख्ती है जो नाम की, हट जाएंगे।
मगर-
मिले दोस्त सच्चा अगर-
उसे कभी खोना नहीं।
जो हर मोड़ पर साथ दें।
उसे अकेला कभी छोड़ना नहीं।
दोस्ती,
ये दोस्ती,
बड़ी अजीब है, ये दोस्ती,
मगर खुशनसीब है ये दोस्ती।
... जगदीश चंद्र कापड़ी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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