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तेरी वफ़ा तेरे वादों का एतबार नहीं

                
                                                         
                            तेरी वफ़ा तेरे वादों का एतबार नहीं।
                                                                 
                            
हा याद आती है तेरी मग़र ये प्यार नहीं।।

गुज़ार लेते हैं लम्हें तेरे बग़ैर भी हम।
मेरी तन्हाई को तेरी कोई दरकार नहीं।।

है जिसका हक़ मुझे अब वो ही याद आता है।
ये ज़िंदगी अब मेरे वास्ते दुश्वार नहीं।।

मेरे खुदा ने अब मुझको संभाल रखा है।
बस इसलिए मेरी आंखे अब अश्क़बार नहीं।।

बहार ऐसी अता की है करने वाले ने।
तेरे बगीचे में "मेंहदी"अब कोई खार नहीं।।
 
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3 महीने पहले

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