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फ़िक्र वो क्या करें जिसके तू साथ हो या रब

                
                                                         
                            तुझे पुकारता रहता हूं दिन हो या रात हो या रब ।
                                                                 
                            
फ़िक्र वो क्या करें जिसके तू साथ हो या रब ।।

दुनियां कहती हैं ज़माने कि कुछ तो फ़िक्र करो ।
दिल ये कहता हैं कि बस तेरी बात हो या रब।।

रगों में तू ही लहू बन के सदा बहता रहे ।
मेरे वजूद में बस तेरी जात हो या रब।।

मेरी खताओं को या रब तू माफ़ फरमा दें।
तेरे करम की अब मुझ पर बरसात हो या रब।।

मैं शुक्र तेरा करु या खता पे शरमाऊं ।
तेरे मेंहदी का अजब ही हालात हैं या रब ।।
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3 महीने पहले

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