चाहते थे कि अपना भी ये सफ़र बदले ।
न उड़ सके हम न जाने कितने पर बदले।
भटक गए थे शुकू की तलाश में हम भी ।
इस जिंदगी में न जाने कितने घर बदले।।
बड़ी मुश्किल से मिला है ये ठिकाना तेरा ।
मांगने के लिए हमने भी कई दर बदले।।
जिसे ज़ुबां से लगाया वहीं खारा निकला।
चन्द कतरों के लिए कितने समंदर बदले।।
अपने"मेंहदी"पर कुछ तो करम कर मौला ।
तेरी बस एक नज़र से तो मुकद्दर बदले ।।
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