पिंजरे में कैद करके कहते हो , आबाद हो तुम ।
पर पंक्षियो को सुनना था कि , आजाद हो तुम ।
दूसरों की खुशियो से बीमार हो , तो बीमार नही बर्बाद हो तुम ।
समझदारी सच में एक बोझ है ।
मै ये सुन लुगी कि बेकार हो तुम , पर अब ये नही सुनना कि समझदार हो तुम ।
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