दुखों का गाना गाकर बंधू , क्या दुख सच में मिट जाते है
सब अपने हिस्से का भोग रहे , ये सबके हिस्से आते हैं।।
क्या अपने संघर्षो का तुमको मान नहीं,
निज भुजबल का सम्मान नहीं।।
तुम देख रहे हो उसको , जिसने जो पाया है
क्यो मान नहीं है उस पर तुमने जो बनाया है।।
सब सम्मान के लायक है , जितना तुमने संघर्ष किया ,
लक्ष्य मिला, या उसको बस तुमने स्पर्श किया ।।
खुद को क्यों शर्मसार करना है ,
किसको सिद्ध करने को चमत्कार करना है ।।
याद रहे तुमसे कोई चमत्कार हो न हो ,
बस बंधू तुम खुद को कहीं खो न दो ।।
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