तेल कहीं पर ईंधन है पर भोजन में यह सागु पकावत।
तीज परै तिवहार जबै तलि कै सबही पकवान बनावत।
दूनउ के जब दाम बढ़े मनई घर मा तब गैस जलावत।
काम कहूँ फँसि जाय कबौ मनई हँसि कै तब तेल लगावत।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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