नींव अगर टेढ़ी हो तो दीवार नहीं सीधी होती।
पहले भ्रष्टाचार रोकते तो फिर आँखें ना रोती।
सैंतालिस में अंग्रेजों ने देश छोड़ प्रस्थान किया।
उससे पहले ही उन सबने इसका एक विधान किया।
कांग्रेस अध्यक्ष देश की बाग डोर को थामेगा।
वही देश का पी एम होगा हर कोई ये मानेगा।
कांग्रेस की पार्टी में अध्यक्ष हेतु फिर खेल हुए।
बारह में पंद्रह मत पा विजयी सरदार पटेल हुए।
पर इस मत को दरकिनार कर नेहरू को सत्ता दी थी।
पहला भ्रष्टाचार यही था गाँधी की सहमति भी थी।
देश विखंडित किया और मुँह पर अपने कालिख पोती।।1।।
पहले शिक्षामंत्री भी थे नहीं यहाँ चुनकर आए।
जन्मभूमि थी अरब मगर नेहरू जी थे उनको लाए।
मौलाना आजाद नाम था माता भी सउदी की थी।
भारत के शिक्षामंत्री बन शिक्षा की अगुवाई की।
मुगलों का महिमामंडन कर हिंदू राजा गौण किए।
दस पीढ़ी मुगलों की गाई मूल बात पर मौन किए।
राम कृष्ण की चार पीढ़ियाँ कहीं नहीं पढ़वा पाए।
खुलते रहे मदरसे लेकिन गुरुकुल न खुलवा पाए।
ये था भ्रष्टाचार रही संस्कृति अपनी मिटती खोती।।2।।
और कहाँ तक कहें दंश हिंदू ने है हरदम झेला।
रुपया आता जाता है ये तो बस है कर का मैला।
टुकड़े टुकड़े देश हो गया बस कुछ भ्रष्टाचारों से।
अपना स्वार्थ रखे सर्वोपरि थू ऐसे मक्कारों पे।
जाति जाति में बाँट बाँट सत्ता पर ही आसीन रहे।
मंदिर सारे टैक्स भरें हिंदू कौड़ी के तीन रहे।
हिंदू देवी और देवता सहते हैं अपमान यहाँ।
करने वाले सेकुलर हैं ऐसा पाओगे देश कहाँ।
पर 'रत्नेश' करेगा क्या सूखे हैं आँखों के मोती।।3।।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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