सुंदर परी कहूँ या उससे सुंदर ही है बोलो ना।
सिर पर है रूमाल मुकुट पर रूठी-सी है बोलो ना।
मुखमुद्रा मनमोहक नैना ज्यों जुग मीन वारि में,
जैसे कोई पुष्प अलौकिक कली रूप में बोलो ना।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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