चिंतन तो करिए मन में सब ओर हुआ बदलाव दिखेगा।
गर्भहिं से मरने तक में बदला हर एक पड़ाव दिखेगा।
रूप कुरूप सबै लखिए सब में परिवर्तन भाव दिखेगा।
शाश्वत एक हवै प्रभु ही वहिका बस एक स्वभाव दिखेगा।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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