सावन की छटा देखि सारा ही विराग हटा, तन मन में उमंग पड़ती दिखाई है।
पेड़न की पाती घास-फूस तक हरी हुई, मानो हरी चूनरि पहिरि धरा आई है।
निमिया की डार झूला परा है टायर वाला, कजरी की धुनि की अलग छवि छाई है।
चलै पुरवैया धान खेतवा लहर मारैं, मानो ई फसल युवती की अँगड़ाई है।
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