पीतर लागि गए जब से तब से शुभ काम न एकु दिखावै।
बारिश होय कबौ रुकि जाय कबौ छपरा तर नीर चुवावै।
पूत उठौ जल देव कहै नित मातु हमै यह नाहिं सुहावै।
जीउ कहै यह मोर सदा भगवान कबौ नहिं पीतर आवै।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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