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पश्चिमी हवा

                
                                                         
                            पश्चिमी हवा जो चली संसकार ले के उड़ी, बस अंगरेजी का प्रभाव ही दिखात है।
                                                                 
                            
भारतीय सभ्यता का सूरज मद्धिम हुआ, ऐसा ही चला तो आने वाली मानो रात है।
देव वाणी और हिंदी में जो ज्ञान भरा हुआ, पराई भाषाओं में न दिखती वो बात है।
आदर सम्मान खो चुकी है आज की ये पीढ़ी, पूजा पाठ, मंत्र इससे न करि जात है।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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एक घंटा पहले

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