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देहु कृपा अपनी मुझको पद पंकज माहिं नमामि नमामी

                
                                                         
                            अंश तुहार गणेश षडानन देव बने जिनके अनुगामी।
                                                                 
                            
गंग बहै सिर पै कटि में मृगछाल सुशोभित सुंदर स्वामी।
भस्म अनंग बनाय दियो मन देखि डरे सब नाम अनामी।
देहु कृपा अपनी मुझको पद पंकज माहिं नमामि नमामी।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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3 महीने पहले

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