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मीत संसार में है वही जान

                
                                                         
                            मीत संसार में है वही जान लो चाहता स्वार्थ को पूर्ण तोसे यहाँ।
                                                                 
                            
है कुटुंबी सभी माल की टोह में जो चुका अर्थ तो ना दिखेंगे वहाँ।
नारियों ने लिया मान है आदमी दर्द ही दे रहा वो दवाई कहाँ।
मौन माता पिता जन्म जो हैं दिए चाहते वो नहीं संपदा का जहाँ।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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9 घंटे पहले

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