कातिक मास अँधेर पखा तिथि चौथि जबै शुभ पावन आवै
नारि सुहागिन धारण कै व्रत नीर बिना दिन मानु बितावै।
दीरघ आयु हुवै पति की यहि के हित मा वह पर्व मनावै।
चाँद दिखै करि पूजन वो पति को लखि कै व्रत को खुलवावै।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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