देख जरा इस जीवन को सुख या दुख हो सब है सहता।
कौन सदैव सुखी जग में नित कौन यहाँ सुख में रहता।
रोवत है जिसमें नहिं धीरज है सबसे दुखड़े कहता।
जीवन है सरिता जल वेग कभी विकराल कभी बहता।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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