हिंदी वर्णमाला में है वर्णों का समूह एक, जिसमें क्रमानुसार वर्ण हैं धरे हुए।
शुरुआत होती 'अ' से यानी कि अज्ञानी से है, अंत होता 'ज्ञ' से ज्ञानी ज्ञान से भरे हुए।
स्वर व अयोगवाह साथ साथ रहते हैं, व्यंजन हैं नीचे ज्यों नक्षत्र उतरे हुए।
लिपि देवनागरी में सारे ही लिखे हैं जाते, देव वाणी माँ है सब उसी को हैं परे हुए।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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