गिरिजापति दीनदयाल सबै फल के तुम पूरनकामी।
देवन देव त्रिशूल लिहे कर देखत दुष्ट हुवैं दुरि गामी।
अंतर वास करौ उर के तम पुंज मिटै प्रभु अंतरयामी।
जाहि धरे दसशीश झुका पद पंकज माहिं नमामि नमामी।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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