हे गननायक हौ वरदायक रिद्धि व सिद्धि बसैं दिशि वामी।
पारवती शिव शंकर पूत लिए तुम बुद्धि बड़ी द्रुत गामी।
पूजित हौ सबसे पहिले सब देवन माहिं तुही इक स्वामी।
कंठ भरौ सुर की सरिता पद पंकज माहिं नमामि नमामी।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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