चिट्ठी भेज रहा हूँ ये माई पढ़ लीजिएगा, रतनेश आपका मैं पुत्र एक प्यारा हूँ।
खड़ग त्रिशूल चक्र कमल धनुष बान, गदा धारि आओ मातु दरस का मारा हूँ।
बल बुद्धि ज्ञान हीन बड़ा मति मंद मूढ़, आपका ही आसरा है माई बेसहारा हूँ।
पापियों का नाश किया भगतों के दुख मेटे, मुझ पे भी दया करो बहुत बेचारा हूँ।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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