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धोती थी कमर पर और काँधे पे जनेऊ

                
                                                         
                            धोती थी कमर पर और काँधे पे जनेऊ, मूँछों पर ताव देके कदम बढ़ाते थे।
                                                                 
                            
माता जगरानी सीताराम पिता जिनके थे, नाम है आजाद यही सबको बताते थे।
जिनकी सुयश का है साक्षी पार्क अलफ्रेड, जहाँ प्राण हीन तन छूते घबराते थे।
उनकी चरण रज को प्रणाम कोटि कोटि, जिनकी माउजर से गोरे थरथराते थे।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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3 घंटे पहले

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