देश के विकास की जो बातें कर रहे देखो, देश को स्वयम उन पे नहीं भरोसा है।
देश ने नकार दिया फिर भी न बुद्धि जागी, इन सब ने सदैव भ्रष्टता में खोंसा है।
जब अवसर मिला खुद पे ही ध्यान दिया, अपने कुटुंब को ही पाला और पोसा है।
इसीलिए आज जनमत से हैं दूर हुए, पूरे देश ने इन्हें विपक्ष ही परोसा है।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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