पति ने घर में निज नारि बुलाय मजाकहिं में वहिका खुब कोसा।
पतनी गरमाय गई कसिकै मन आइ गई वहिके अति रोसा।
वह नारि भई विष नागिनि सी कड़ुवाहट भोजन थाल परोसा।
पति खाय रहे सुसुवाय रहे बतलाय रहे अब टूट भरोसा।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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