बंदर ईमानदार हम बेईमान हुए, कभी वह झूठ मूठ खींस न निपोरता।
सूट बूट टाई-वाई भी नहीं लपेटता है, न ही वाहवाही व्यर्थ की कभी बटोरता।
उचक उचक के पकड़ता डाल किंतु, हम लोगों जैसे नहीं लंबी लंबी छोड़ता।
स्वाद अदरक का वो जाने या न जाने पर, दूसरों का रुधिर कभी नहीं निचोड़ता।
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