आस्था पे चोट पहुँचाई गई शुरू से ही, कभी कालनेमि आए तो कभी मुगल थे।
सोमनाथ विश्वनाथ आदि मंदिरों को तोड़ा, हिंदुओं के हेतु लिए मन मे गरल थे।
देवी देवताओं के मजाक भी उड़ाए गए, पर भक्ति डिगी नहीं वे सभी विफल थे।
तिलक मिटाए व जनेऊ थे जलाए गए, पर हैं अटल हम तब भी अटल थे।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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