आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सावन आनेवाला है

                
                                                         
                            कल अचानक मन में आया
                                                                 
                            
मौसम बदलने वाला है
ले आई रस्सी झट मार्केट से
सावन आनेवाला है।

हरी हरी पोशाक अब पहनी
सही यही तो फैसला है
रस्सी कूदूं चश्मा उतारकर
मन बहलने वाला है।

मेमोरी रिकाॅल किया बचपन का
जीवंत क्या यह कला है
जाग उठा हौसला मेरा
कूदने में जीवन भला है।हैपी सावन 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर