कल अचानक मन में आया
मौसम बदलने वाला है
ले आई रस्सी झट मार्केट से
सावन आनेवाला है।
हरी हरी पोशाक अब पहनी
सही यही तो फैसला है
रस्सी कूदूं चश्मा उतारकर
मन बहलने वाला है।
मेमोरी रिकाॅल किया बचपन का
जीवंत क्या यह कला है
जाग उठा हौसला मेरा
कूदने में जीवन भला है।हैपी सावन
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