को जोर अगर हम
शपथ लें आज सवेरे
मिलजुलकर हम स्वच्छ करेंगे
होंगे स्वस्थ सवेरे।
प्रकृति बनी है पेड़ पौध से
कोई न इसको छेड़े
सुरक्षित होगा पर्यावरण हमारा
अगर हो हरे घनेरे ।
मूल्यवान है जीवन मेरा
इसपर न पानी फेरें
स्वच्छ करें हम बाग बगीचा
नदिया नाल के तीरे ।
गंदगी को हम दूर भगाएँ
लगाएँ झाड़ू फेरे
स्वच्छ कर्म में शर्म नहीं है
अगर समझे' कर्म हैं मेरे ।
असल गंदगी भेदभाव है
परें न इसके फेरे
जात पात के नीच सोच को
कर दें दर किनारे ।
तन से कोई जात न पाता
है यह मन के फेरे
स्वच्छ कर्म कर स्वच्छ बनें हम
स्वच्छ जात हों मेरे।
आओ मिलकर स्वच्छ करें हम
समझें फर्ज यह मेरे
बापू का यह स्वप्न साकार कर
बढ़ें हम साँझ सवेरे ।
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