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पुराना भी बदलता है

                
                                                         
                            ज़माने की हकीकत है जमाना भी बदलता है
                                                                 
                            
मिले बेहतर यहाँ कोई ठिकाना भी बदलता है

बदलना उनकी फितरत है समझ ये हम नहीं पाये
कि जब मौसम बदलता है फ़साना भी बदलता है

कहूँ क्या खूब उनकी चाल से बाक़िफ रहा हूँ मैं
कोई जितना पुराना हो पुराना भी बदलता है

जिसे तुम अपना कहते हो चले जाओगे उस घर से
कि काँधे पे जनाज़ा हो जनाज़ा भी बदलता है

दिल ऐ नादान उम्मीदें भी तूने खूब देखी हैं
कि दुनिया में दिलों का आशियाना भी बदलता है

जवां नस्लों को कहता है रज़ा ये राज़ की बातें
कि अपने बाप के आगे घराना भी बदलता है
-इम्तियाज़ रज़ा
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2 महीने पहले

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