नफरत के इस आलम में , सच्चा अरमान नहीं मिलता ,
हिंदू मुस्लिम मिलते है , कोई इंसान नहीं मिलता ।
झूठी तेरी इबादत है , झूठे तेरे सब वादे हैं
इक दूजे से ग़ैर करे , ये कैसे नेक इरादे हैं ,
मस्जिद में अल्लाह और , मंदिर में भगवान नहीं मिलता
हिंदू मुस्लिम मिलते हैं , कोई इंसान नहीं मिलता ।
बँट गये ईद दीवाली , बँट गये होली के रंग ,
घटिया कितनी सोच हुई , दिल हो गया कितना तंग ,
भगवत के श्लोकों में अब , कहीं कुरआन नहीं मिलता
हिंदू मुस्लिम मिलते हैं , कोई इंसान नहीं मिलता ।
अश्कों को दामन में भर , मुझसे पूछ रही हैं गंगा ,
और कितना लहु बहेगा , होगा आदम कितना नंगा
लाशों के ढ़ेर लगे हैं , इनको शमशान नहीं मिलता ।
हिंदू मुस्लिम मिलते हैं , कोई इंसान नहीं मिलता ।
धरती रोती रहती है , अंबर भी दिखता व्याकुल है ,
मानवता को कत्ल करे , बोलो तो ये किसका कुल है ,
मन में पीड़ा भरी पड़ी , कोई उत्थान नहीं मिलता ।
हिंदू मुस्लिम मिलते हैं , कोई इंसान नहीं मिलता ।
मासूमों की लाशों पर , जो सत्ता का खेल रचाये ,
उसको पहले मारो सब , जो नफरत का बीज लगाये ,
इससे बढ़कर अब इसका , कोई समाधान नहीं मिलता ,
हिंदू मुस्लिम मिलते हैं , कोई इंसान नहीं मिलता ।
#सर्वाधिकार सुरक्षित
कुमार प्रकाश
वाराणसी
9450915260
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