तुम्हें लगा था तुम्हारे जाने से बिखर जाएँगे हम,
हमने ख़ुद को समेटा तो कुछ लोग जल गए, राज।
जिन्हें हमारी ख़ामोशी कमज़ोरी लगी थी कभी,
आज उन्हीं की महफ़िल में हमारा ज़िक्र है, राज।
-हुकम राजपुरोहित
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