देश की माटी को फूल से समाज।
संस्कृति को अनुकूल से समाज।
माटी की खुशबू धारण करके,
वैनगंगा अंचल मा बसी से समाज।।
पोवार समुदाय की
एक स्वतंत्र मातृभाषा से पोवारी।
संस्कृत भाषा लक उद्भुत,
हिन्दी वानी सरल भाषा से पोवारी।।
वैनगंगा अंचल का पोवार
कहलाव् सेती धारानगरी का पोवार।
पोवार समाज से,
युग युग पासून कुशल कास्तकार।।
औरंगजेब को काल मा
मालवांचल सोड़न को बनाईस मन ।
अना बख्त बुलंद को,
देवगढ़ राज्य मा करीस स्थानांतरण।।
पोवार समुदाय न् सोड़ीस
मालवा राजस्थान को आपलो वतन।
नगरधन को किला मा,
करीस कुटूंब कबिला सहित आगमन।।
गोंड राजा बख्तबुलंद सीन
ठेईस आपला मधुर मीठा संबंध।
मराठा शासन काल मा,
ठेईस आपला प्रेम भाव का संबंध।।
दूही शासकों सीन पाईस
उपहार मा किसानी साती जमीन।
किसानों को रुप मा,
स्थापित करीस ज़िन्दगी नवीन।।
मालवांचल मा
पोवार होता उत्तम कास्तकार।
खेती किसानी को साथ,
होता सैनिक सरदार किलेदार।।
वैनगंगा अंचल मा
धान की खेती को करीस विस्तार।
काही व्यक्ति बन गया,
महाजन,मालगुजार अना जमींदार।।
ब्रिटिश शासन काल मा
खेती विस्तार मा देईस योगदान।
अंग्रेज अधिकारियों द्वारा,
पाईस यथोचित मान सम्मान।।
नेतृत्व क्षमता को कारण
गांव- गांव मा लेईस उत्तम पुढ़ाकार।
उत्तम जीवन यापन साती,
लेईस खेती ना मेहनत को आधार।।
गौरवशाली से इतिहास
समाज को ठाट-बाट अना संस्कार।
सनातनी संस्कृति लक,
परिव्याप्त से जीवन अना व्यवहार।।
स्वतंत्रता संग्राम मा
पोवार समाज न् लेईस सहभाग ।
स्वतंत्र भारत मा,
सैन्य दल मा देय रही से योगदान।।
आज़ादी को पश्चात
थाम लेईस शिक्षण को दामन।
समाज को युवाओं न् ,
नवयुग मा नाव करीन रोशन।।
पोवार समुदाय को
राष्ट्र निर्माण मा से अमूल्य योगदान।
उत्तम किसानी को कारण,
समाज से केंद्रीय भारत की शान।।
गौरवर्णीय सुंदर चेहरा- मोहरा से।
समान खून, समान वंश परम्परा से।
एक जाति एक मातृभाषा को कारण , सुख दुःख मा एक दूजों को सहारा से।।
वैनगंगा अंचल मा मुख्य बसेरा से।
खेती किसानी करती मुख्य धारा से।
एक जाति एक इतिहास को कारण ,
सुख दुःख मा एक दूजों को सहारा से।।
खान- पान की समान परंपरा से।
पोवारी संस्कृति की उज्ज्वल धारा से।
एक जाति समान परंपरा को कारण , सुख दुःख मा एक दूजों को सहारा से।।
क्षत्रिय वंश की या विशेष धारा से ।
छत्तीस कुल को संगठित बसेरा से।
एक जाति समान आदर्शों को कारण,
सुख दुःख मा एक दूजों को सहारा से।।
रिश्तों- नातों लक गूथेव बसेरा से।
सजातीय विवाह की यहां परंपरा से।
एक जाति एक मान्यताओं को कारण,
सुख दुःख मा एक दूजों को सहारा से।।
सनातनी हिन्दुत्व की विचार धारा से।
सब मा परस्पर एकता भाईचारा से।
एक जाति एक संगठन को कारण ,
सुख दुःख मा एक दूजों को सहारा से।।
पूर्व मध्ययुग पासून स्वतंत्र धारा से।
समान इतिहास की विशेष धारा से।
एक जाति एक मातृभाषा को कारण ,
सुख दुःख मा एक दूजों को सहारा से।।
पोवारी संस्कृति पर
पड़ रही से आधुनिकता की मार।
प्रबुद्ध वर्ग से प्रयासरत ,
बचावन पहचान, संस्कृति, संस्कार।।
समाज होय रही से
पहचान मिटाओ षड़यंत्र को शिकार।
जनजागृति साती,
शुरु से समाज मा धुआंधार प्रचार।।
समकालीन समाज का युवा
कर रहया सेत पोवारी को प्रचार-प्रसार।
होय रही से मातृभाषा मा,
सुधार ,परिष्कार अना उत्कर्ष को प्रयास।।
-ओ सी पटले
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