सन् 2018 को पहिले
भाषा को संरक्षण पर होतो ध्यान।
सन् 2018 मा,
भाषा मा सुधार को भयेव शंखनाद।।
पोवारी भाषा को
सुधार व परिष्कार ला देया अग्रस्थान।
भयेव भाषा को उत्कर्ष,
पोवारी भाषा को बढ़ेव मान सम्मान।।
पोवारी को साहित्य ला
हिन्दी मंचों पर, मिल रही से नित्य सम्मान।
हिन्दी मंचों पर बढ़ती प्रतिष्ठा,
देय रही से पोवारी को उत्कर्ष को प्रमाण।।
पोवारी को साहित्य ला
हिन्दी पत्रिकाओं मा, मिल रही से स्थान।
हिन्दी जगत मा बढ़ती प्रतिष्ठा,
देय रही से पोवारी को उत्कर्ष को प्रमाण।।
पोवारी साहित्य ला
समाचार पत्रों मा, मिल रही से स्थान।
समाचारों मा बढ़ती प्रतिष्ठा,
देय रही से पोवारी को उत्कर्ष को प्रमाण।।
पोवारी साहित्यिकों को
समाज मा आता, बढ़ रही से प्रमाण।
साहित्यिकों की बढ़ती संख्या,
देय रही से भाषा को उत्कर्ष को प्रमाण।।
पोवारी कलाकारों को
समाज मा आता, बढ़ रही से प्रमाण।
कलाकारों की बढ़ती संख्या,
देय रही से भाषा को उत्कर्ष को प्रमाण।।
पोवारी भाषा को साहित्य
प्रकाशित होन को बढ़ गयी से प्रमाण।
पुस्तकों की बढ़ती संख्या,
देय रही से भाषा को उत्कर्ष को प्रमाण।।
2018को पहिले अना बाद की
मातृभाषा की प्रतिष्ठा को, करो विचार।
भाषा को होय रही से उत्कर्ष,
येवच से समकालीन परिदृश्य को सार।।
-ओ सी पटले
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X